क्या उतरेगा आँखों में समंदर का पानी
जा के पूछ दरियाओं से कि किसके अश्क़ बहते हैं उसके दामन में |- Priyadarshan Shastri
Thursday, September 13, 2012
हमारी क़िस्मत में न सही तो न सही
पर खुदा तुमको बहुत दे,
तुम्हारे हिस्से में से कुछ के भरोसे
हम अपनी जिंदगी गुज़ार लेंगे|-PDShastri
Tuesday, September 11, 2012
कुछ न कुछ तो था,
वरना इतने 'गए-गुजरे' तो हम न थे
के, हमारा इस्तक़बाल ही न हुआ |
चलो ! अब तो महफ़िल भी ख़त्म हुई
वे माँगने माफ़ी न जाने कब आएँ ?
-PDShastri
दिल के टूटने में उनका कोई क़सूर नहीं
वो तो शीशे का था, हल्की सी चुभन भी सह ना सका | -PDShastri
Thursday, September 6, 2012
रगें जुदा हो सकती हैं तेरी मेरी ऐ मेरे यार,
तेरा भी लहू सुर्ख है तो मेरा खूं भी लाल है |
- PDShastri
Monday, September 3, 2012
यहाँ उंगलियाँ ही काफी हैं जिंदगी का हिसाब करने को
किसी मुहासिब को बुलाने की बात हमसे न किया करो ।
- P. D. Shastri
क़दम रखना ज़रा सम्हल कर ये ज़मीं कुछ ऊँची-नीची है
कहीं तू फिसल न जाए इस बात की फिक़्र मुझे भी रहती है |
- P. D. Shastri