Tuesday, August 28, 2012


मुझे फक़्र है कि मैं भी उसी ज़मीं पर हूँ जिस ज़मीं पर तू बसता है,
कहीं कुछ ऐसा मत कर देना ऐ मेरे यार ! कि फिर मुझे मेरी दुनिया में लौट जाना पड़े |
                   -P D Shastri

Saturday, August 11, 2012

.....ये शहर बड़ा गंदा है


ये शहर बड़ा गंदा है
ये शहर बड़ा ही गंदा है.......।
यहाँ ईमान है न शर्म है, न वफ़ा है न हया है,
न जानता कोई कीमत यहाँ  
माँ के इक दूध की, पानी भी यहाँ जो बिकता है,
वो भी बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा ही गंदा है.......।

यहाँ दिन है न रात है, न सुख है न चैन है,
न नींद है न जाग है,
यहाँ पैसे की बड़ी चाह है  
बस एक ही फंडा है,
ये शहर बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा ही गंदा है.......।

यहाँ  इन्सा हैं न रिश्ता है, न चाह है न आस  है,   
यहाँ जिंदगी मिलती नहीं,
ये मौत का सामान है,
यहाँ मौत बड़ी आसान है,
ये शहर बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा ही गंदा है........।

सलाह मेरी इक मान लो
यहाँ मुर्दे भी रखते हैं  इक  जेब  
तुम भी इक रख लेना,
क्योंकि .....कफ़न भी बिकते है यहाँ,
ये भी इक बड़ा धंधा है,
ये शहर बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा ही  गंदा है......।

आया था इक रास लिए वो यहाँ मिलती नही ,
मैं भी बहुत थक चुका, अब याद गाँव आता है,
मुझे नींद लम्बी आ रही, जेब में कुछ रखा है,

ये शहर बड़ा गंदा है,
ये शहर बड़ा ही गंदा है........। - Priyadarshan Shastri

Saturday, August 4, 2012


कुछ निशानियाँ आपकी कुछ निशानियाँ हमारी,
आओ चलें मित्रता का इक मंदिर बनालें,
मिटा लें सारी दूरियाँ
सपनों का इक घर बसालें |
-Priyadarshan Shastri