Tuesday, July 31, 2012


ये आईना भी कुछ अजीब है,
जब भी देखता हूँ इसमें तुम नज़र आते हो,
ये मुझे भूल जाता है अक़्सर,
पर तुम्हारा चेहरा हमेशा याद रखता है |
-Priyadarshan Shastri

Sunday, July 29, 2012

मैं तो जंगली हूँ जंगल में ही रहने दो,
तुम जंगल को शहरों में ना बादलो 
वरना मुझे तुम जैसा इन्सा बनाना पड़ेगा |
-Priyadarshan Shastri

Monday, July 23, 2012



जनाज़े से बाहिर झाँक के जब भी देखता हूँ तो हँसी आ जाती है कि
जो लोग मुझे जहाँ ले जाते हैं कल कोई और उन्हें वहाँ ले जा रहा होगा|


































-Priyadarshan Shastri

Friday, July 20, 2012


दिल वो ज़मीं है चाहो तो प्यार बोओ या नफ़रत तुम्हारी मर्ज़ी
पर दोस्तों ! बीज नफ़रत के भी कम नहीं हैं,
तो उधर हालत कुछ किसानों के भी अच्छे नहीं हैं |
-Priyadarshan Shastri

Thursday, July 19, 2012

दरिया हूँ बहना मेरी फ़ितरत है 
गर किसी के पुकारे ठहर गया 
तो फिर मैं दरिया नहीं |
-Priyadarshan Shastri
क़ब्र पर मेरी कुछ काँटे रख देना 
कोई पूछे तो कहना देना कि 
इक फूल था जो दफ़न हो गया |

-Priyadarshan Shastri
कांटों में रहकर गुलाबों की तरह मुस्कुराया था मैं 
पर लोग, मुझे ही तोड़ कर चल दिए |
- priyadarshan Shastri

Wednesday, July 18, 2012

कल जो बीत गया सो बीत गया, आने वाला कल किसका है मैं न जानू |
मैं तो बस इतना जानू जो आज है वो मेरा अपना है, बस मेरे पास है |

इक बूँद बनाती है समंदर, 
इक बूँद ही है जो प्यासे की बुझाती है प्यास, 
इक बूँद ही तो बनती है आँसू,
इक बूँद ही तो बनाती है मोती,
इक बूँद ही है जो जीवन में जगाती है आस |


-Priyadarshan Shastri
   
फिर से याद आगया वो बचपना
वो बारिशें वो बस्ता वो किताबें
वो जुराबें वो भीगना वो नहाना 
क्या था वो जमाना,
सबकुछ तो भुला दिया जिंदगी के सबक़ ने,
माँ ! फिर से मेरा बस्ता ज़रा ढूँढ दे
बाहर बारिश खड़ी पुकार रही 
चल फिर से स्कूल खुल गए | 




-Priyadarshan Shastri


या खुदा ! बस थोड़ा ही दे
पर मेरे छप्पर को न फाड़
तुझे क्या पता बड़ी मेहनत से जोड़ा है


यूँ न निहारो ढलते सूरज को 
अब तो चले आओ माँ तुम्हें है पुकारती
जिंदगी की शाम हो गई है अब, 
पर रही अधूरी खोज तुम्हारी |
कल फिर सूरज निकलेगा,
एक नई पहचान तुम्हें है तलाशती |




-Priyadarshan Shastri