फिर से याद आगया वो बचपना
वो बारिशें वो बस्ता वो किताबें
वो जुराबें वो भीगना वो नहाना
क्या था वो जमाना,
सबकुछ तो भुला दिया जिंदगी के सबक़ ने,
माँ ! फिर से मेरा बस्ता ज़रा ढूँढ दे
बाहर बारिश खड़ी पुकार रही
चल फिर से स्कूल खुल गए |
-Priyadarshan Shastri
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