Wednesday, July 18, 2012

इक बूँद बनाती है समंदर, 
इक बूँद ही है जो प्यासे की बुझाती है प्यास, 
इक बूँद ही तो बनती है आँसू,
इक बूँद ही तो बनाती है मोती,
इक बूँद ही है जो जीवन में जगाती है आस |


-Priyadarshan Shastri
   

No comments:

Post a Comment