Wednesday, December 5, 2012


ऐ हसीं काग़ज़ के नोटों ! तुम्हारा साथ तो
किसी मरघटी खामोशी से कम नहीं,
मेरे वो चंद सिक्के ही, भले !
चलता हूँ तो बजते है,
लगता है कोई ख़ूबसूरत हसीं
हमसफ़र-खनकाती पायल,
मेरे नक्शे क़दम पर, मेरे साथ है।
- प्रियदर्शन शास्त्री

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