क्या उतरेगा आँखों में समंदर का पानी
जा के पूछ दरियाओं से कि किसके अश्क़ बहते हैं उसके दामन में |- Priyadarshan Shastri
Saturday, December 1, 2012
सदियों से बुझा न सकी हवाएँ जिन दियों को,
तुमने उन्हें इक फूँक में बुझा दिया,
शातिर हो इन्सा तुम
इन हवाओं से भी ज्यादा,
हवाएँ तो बस इतना भर जानती थीं कि
दीए जलते हैं, पर तुम्हें पता है कि
दिए नहीं, सिर्फ़ बातियाँ जला करती हैं।
-प्रियदर्शन शास्त्री
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