
मां तू भी समंदर है,
अपने जाये के पीछे भागती
कभी थकती नहीं,
तेरा जाया है कि लहरों की मानिंद
कभी रुकता नहीं,
समंदर तो जानता है लहरों की
पहुँच को, वो
धरा के क़नारे से परे नहीं,
पर तू नहीं जानती, इतना बस!
तेरे जाये का कोई किनारा ही नहीं।
-प्रियदर्शन शास्त्री
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