Wednesday, November 28, 2012


मां तू भी समंदर है,
अपने जाये के पीछे भागती
कभी थकती नहीं,
तेरा जाया है कि लहरों की मानिंद
कभी रुकता नहीं,
समंदर तो जानता है लहरों की
पहुँच को, वो
धरा के क़नारे से परे नहीं,
पर तू नहीं जानती, इतना बस!
तेरे जाये का कोई किनारा ही नहीं।
-प्रियदर्शन शास्त्री

सब कुछ लुट गया, मिट तब वे आकर बड़ी शिद्दत से पूछते हैं 
'सब खैरियत तो है ?'
हम भी क्या कहते, कह दिया 'सब आपकी मेहरबानी है।'
                                                                         -प्रियदर्शन






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Monday, November 26, 2012

जो नज़र नहीं आते, बस
उन बिन्दुओं को मैं रचता हूँ,
ये बिंदु ही हैं आधार उन तस्वीरों के
जिन्हें देख दुनिया कहती है
वाह ! क्या चितेरा है, परन्तु
मैं जानता हूँ दुनिया की आँखों की कूवत,
वे सिर्फ लकीरें देख पाती हैं
उनमें छिपे बिन्दुओं को नहीं।   -प्रियदर्शन शास्त्री
  

उधर तारों की नुमाइश में भी खलल पड़ता है
इधर चाँद को भी 'राहत' ने पगला क़रार दिया है
ऐसे में तुम छत पर अकले आ जाते हो
मुझे तो ये आसमाँ भी बड़ा ना गवार सा लगता है|-प्रियदर्शन शास्त्री
(राहत इंदौरी साहब के शेर से प्रेरित)

Thursday, November 22, 2012


ईश्वरोच्चारित शब्द की तरह हो यदि तुम
तो अर्थ क्यों तलाशते हो
क्यों ढूंढते हो परिभाषा अपनी, मेरी तरह
मैं तो उस शब्द की तरह हूँ जो
भाग्य की लकीरों पर लिखा जाता है
पर तुम्हारा लेख तो खुद ईश्वर है |- प्रियदर्शन शास्त्री

Wednesday, November 14, 2012

आज मेरी मय्यत में इक चिड़िया भी थी,
जिसे भूले से मैंने कभी दाना दिया था।
अब कैसे कह दूँ कि 
दुनिया अहसान फरामोश है।
                       -प्रियदर्शन शास्त्री