
जो नज़र नहीं आते, बस
उन बिन्दुओं को मैं रचता हूँ,
ये बिंदु ही हैं आधार उन तस्वीरों के
जिन्हें देख दुनिया कहती है
वाह ! क्या चितेरा है, परन्तु
मैं जानता हूँ दुनिया की आँखों की कूवत,
वे सिर्फ लकीरें देख पाती हैं
उनमें छिपे बिन्दुओं को नहीं। -प्रियदर्शन शास्त्री
No comments:
Post a Comment