Monday, November 26, 2012


उधर तारों की नुमाइश में भी खलल पड़ता है
इधर चाँद को भी 'राहत' ने पगला क़रार दिया है
ऐसे में तुम छत पर अकले आ जाते हो
मुझे तो ये आसमाँ भी बड़ा ना गवार सा लगता है|-प्रियदर्शन शास्त्री
(राहत इंदौरी साहब के शेर से प्रेरित)

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